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विश्व आदिवासी दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न : आदिवासी विश्व की सर्वाधिक प्राचीनकाल से निवासरत मूल निवासी है-गुलाब कमरों

Praveen Nishee Tue, Aug 12, 2025

मनेंन्द्रगढ। एमसीबी । संयुक्त राष्ट्र संघ के आव्हान पर सर्व आदिवासी समाज जिला एमसीबी द्वारा विश्व आदिवासी दिवस बडे ही हर्षोल्लास और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों व समाज के पदाधिकारियों द्वारा प्रकृति पूजा के प्रतीक के रूप में सिविल लाइन शिव मंदिर परिसर में स्थित पीपल के वृक्ष की परंपरागत पद्धति से पूजा अर्चना कर की गयी। इसके उपरांत उपस्थित सभी महिला पुरुष बालक बालिकाओं द्वारा कतारबद्ध होकर विशाल रैली निकाली गयी। रैली में परंपरागत वाद्य यंत्र एवं ढोल नगाडो के साथ करमा दल,सुवा दल और शैला दल आदि विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे। रैली सांई मंदिर से भगत सिंह तिराहा मूख्य बाजार ,झगराखांड रोड एवं खेडिया टाकीज होते हुए विमलश्री टाकीज में आकर सभा के रुप में परिणित हो गया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में मंचासीन अतिथियों व समाज पदाधिकारियों द्वारा संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर, शहीद बीर नारायण सिंह ,धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा और भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पूजन कर किया गया। अतिथियों के स्वागत सत्कार उपरांत उदबोधन के क्रम में मुख्य अतिथि व पूर्व विधायक गुलाब सिंह कमरो द्वारा सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी विश्व की सर्वाधिक प्राचीनकाल से निवासरत मूल निवासी है। जो प्रकृति की गोद में पैदा होकर निरंतर संघर्ष करते हुये आगे बढता रहा है।तथा आज पर्यंत अपने अस्तित्व को बरकरार रखे हुआ है। मानव और प्रकृति एक दूसरे के पूरक बन कर सृष्टि की विकास यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाते रहे हैं। आज भी आदिवासियों की संस्कृति व परंपरा में प्रकृति की अहम भूमिका होती है।अतः मानव अस्तित्व के संरक्षण संवर्धन में निर्णायक भूमिका निभाने वाली प्राकृतिक संपदा जल जंगल जमीन आदि पर पहला हक आदिवासियों का ही है। परन्तु बडे खेद के साथ कहना पड रहा है,कि आज प्रकृति की अनमोल संपदा जल जंगल जमीन से आदिवासियों को बडे ही सुनियोजित ढंग से षड्यंत्र करके बेदखल किया जा रहा है।सत्ता और पूंजीपतियों के गंठजोड से विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों को तहस नहस का सिलसिला जारी है।ऐसे षड्यंत्र व कुचक्र के खिलाफ हम सबको संगठित रुप से सामने आना होगा। कार्यक्रम अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष शरण सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए बतलाया कि विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को मनाये जाने का फैसला वर्ष 1982 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा लिया गया था। पहला विश्व आदिवासी दिवस 1995 में मनाया गया था। इस विश्व ब्यापी अभियान आयोजन द्वारा सम्पूर्ण विश्व का ध्यान जनजाति समाज वर्तमान दशा एवं उनकी समस्याओं पर शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करवाने के लिये किया जाता है। आज 21 वीं शताब्दी में भी हमारा आदिवासी समाज गरीबी,भुखमरी,शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। इसके उन्मूलन के लिये समाज के सक्षम और प्रबुद्ध जनों को सामने आकर आवाज बुलंद करना होगा। कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के रुप में भगवान सिंह, समाज के संरक्षक परमेश्वर सिंह, पूर्व जनपद अध्यक्ष विनय शंकर सिंह, अमोल सिंह मरावी, विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव,अधिवक्ता रामनरेश सिंह पटेल आदि द्वारा संबोधित कर सम्पूर्ण समाज जनों को बधाई देकर उनके चहुंमुखी विकास के लिए शुभकामनायें दी गयी।कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी रंगारंग प्रस्तुति हुई। पारंपरिक लोक गीतों पर सुंदर और मनमोहक नृत्य सिरौली, डंगौरा और डोमनापारा की बालिकाओं द्वारा किया गया। करमा नृत्य दल चैनपुर और शैला नृत्य सिरौली की प्रस्तुति भी विशेष प्रशंसनीय रही। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन परमेश्वर सिंह मरकाम व ब्रम्हा सिंह द्वारा किया गया।आभार प्रदर्शन सीताराम भगत द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से जनपद अध्यक्ष मनेंन्द्रगढ श्रीमती जानकी कुसरो, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती ममता सिंह, जिला सदस्य रामजीत लकड़ा, श्रीमती अनीता सिंह, सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष राम प्रसाद सांडिल्य, डॉ .एस एस सिंह, संतोष सिंह कमरो, दल प्रताप उर्रे,राजाराम कोल,दिनेश कोल, नभाग सिंह, श्रीमती ललिता पाव,श्रीमती कौशिल्या सिंह, महेंद्र सिंह, सरोधन सिंह, भगवत मरावी,सुजीत सिंह अमृत सिंह ,भवन सिंह, देवन सिंह पावले, भूपेंद्र सिंह, बबन सिंह, सरपंच चनवारीडांड सोनू, आदि सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे।

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