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नारी ही परिवर्तन की धुरी — सप्तशक्ति संगम में गूँजे जागरण के स्वर : नारी शक्ति ही समाज,परिवार और देश में परिवर्तन की धुरी है,समाज की कुरीतियों का दहन भी नारी ही कर सकती है-डॉ. रश्मि सोनकर

Praveen Nishee Tue, Dec 2, 2025

मनेंद्रगढ़। एमसीबी। भारत के विकास में आदिकाल से ही महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वे परिवार की आधारशिला होने के साथ-साथ बच्चों को संस्कारित कर समाज को जिम्मेदार नागरिक प्रदान करती हैं। वर्तमान समय में महिलाएं पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

संघ के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर विद्या भारती संस्थान द्वारा देशभर में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सरस्वती शिशु मंदिर झगराखंड के उपरांत सरस्वती शिशु मंदिर सरभोका में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महिलाओं द्वारा, महिलाओं के लिए समर्पित है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. रश्मि सोनकर ने महिलाओं के ऐतिहासिक और आधुनिक योगदान पर विस्तृत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति ही समाज, परिवार और देश में परिवर्तन की धुरी है। समाज की कुरीतियों का दहन भी नारी ही कर सकती है।

वंदना पांडे ने कुटुंब प्रबोधन विषय पर बोलते हुए कहा कि आजकल एकल परिवार का प्रचलन बढ़ रहा है, ऐसे समय में तीन पीढ़ियों का एक साथ निवास हमारे संस्कार, सामंजस्य और सामाजिक संरचना को मजबूत बनाता है।

मीना त्रिपाठी ने पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति पूजनीय रही है, इसलिए पेड़–पौधों, नदियों और जलस्रोतों की स्वच्छता और सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष चंपा देवी पावले ने सभी महिलाओं से आग्रह किया कि वे कार्यक्रम में रखे गए विचारों को अपने व्यवहार और जीवन में उतारने का प्रयास करें।

कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार, प्राचार्य और समस्त शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर अध्यक्ष चंपा देवी पावले, वंदना पांडेय, मीना त्रिपाठी, सुषमा दत्ता, सरपंच मालती, उपसरपंच सुधा सहित पंचायत की अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।

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