ठेका श्रमिकों की सूची और भुगतान का विवरण सार्वजनिक करने की मांग : कोल इंडिया में 61 प्रतिशत से अधिक ठेका श्रमिकों का नियोजन, बोनस भुगतान में गड़बड़ी का अख्तर जावेद उस्मानी ने लगाया आरोप
मनेंद्रगढ़। एमसीबी। कोल इंडिया लिमिटेड में ठेकेदारी प्रथा के तहत नियोजित मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कोयला उद्योग में स्थायी और प्रतिबंधित प्रकृति के कार्यों में भी ठेका श्रमिकों से काम कराए जाने तथा उन्हें निर्धारित वेतन से कम भुगतान किए जाने का आरोप सामने आया है। अब ठेका श्रमिकों को प्रॉफिट लिंक्ड इंसेंटिव (बोनस) के भुगतान में भी अनियमितताओं का मामला उठने लगा है।
हिन्द खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने हाई पावर कमेटी की वेतन अनुशंसा को ठेका श्रमिकों के शोषण का माध्यम बताते हुए कहा कि वर्ष 2013 से ही कम वेतन भुगतान और भ्रष्टाचार की शिकायतें जारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर 26 दिन काम कराने के बावजूद केवल 13 दिन का वेतन दिया जाता है। मजदूरों के बैंक खातों में वेतन जमा कराकर वापस लेने, अनुबंध के विपरीत श्रमिकों को रखने और हटाने तथा इसकी सूचना तक नहीं देने जैसी गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि पहले प्रतिबंधित और स्थायी प्रकृति के कार्यों के ठेका अनुबंधों में श्रमिकों को न्यूनतम वेतन कैटेगरी-1 के अनुसार भुगतान करने का प्रावधान रहता था। राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौतों में स्थायी एवं निरंतर प्रकृति के कार्यों में ठेकेदारी को प्रतिबंधित करने के बावजूद समय के साथ ठेका श्रमिकों की संख्या बढ़ती गई। उन्होंने यह भी कहा कि ठेका श्रमिकों के स्थायीकरण की प्रक्रिया दूसरे वेतन समझौते के समय साइडिंग वैगन लोडर्स से शुरू हुई थी।
उस्मानी के अनुसार, 13 अगस्त 2012 को विभिन्न श्रमिक संगठनों के नेताओं ने हाई पावर कमेटी के वेतन निर्धारण संबंधी अनुशंसा पर हस्ताक्षर किए। इसमें उद्योग के कैटेगरी-1 वेतन और अन्य खदानों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के आधार पर नया वेतनमान प्रस्तावित किया गया, जो उनके मुताबिक कैटेगरी-1 वेतन का लगभग 60 प्रतिशत से भी कम था। 13 फरवरी 2013 को कोल इंडिया बोर्ड की 294वीं बैठक में इस अनुशंसा को स्वीकृति दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की बैठकों के माध्यम से माइन मैनेजरों के वाहन चालकों, निजी सुरक्षा कर्मियों तथा हायरिंग ऑफ इक्विपमेंट और मेंटेनेंस कार्यों से जुड़े श्रमिकों को भी हाई पावर कमेटी की अनुशंसा से बाहर कर दिया गया। इसके चलते अनेक श्रमिक कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं और उनके स्थायीकरण के कानूनी रास्ते भी प्रभावित हुए हैं।
कोल इंडिया में 61.21 प्रतिशत ठेका श्रमिक
अख्तर जावेद उस्मानी ने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 61.21 प्रतिशत श्रमिक ठेका प्रणाली के अंतर्गत नियोजित हैं। कुल 1,20,736 ठेका श्रमिकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में लगभग 24,246 ठेका श्रमिक हैं, जो 66.715 प्रतिशत बताए गए हैं। वहीं नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में 13,008 स्थायी कर्मचारियों के मुकाबले 24,365 ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड में भी ठेका श्रमिकों की संख्या स्थायी कर्मचारियों से दोगुनी बताई गई है।
बोनस भुगतान में अनियमितता का आरोप
उस्मानी ने बताया कि 3 अक्टूबर 2026 को ठेका श्रमिकों को प्रॉफिट लिंक्ड इंसेंटिव देने के संबंध में चर्चा और समझौता हुआ था। इसके बाद हिन्द मजदूर सभा के महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू ने ठेका मजदूरों को बोनस का सही भुगतान सुनिश्चित कराने की चुनौती स्वीकार करने का आह्वान किया था। लेकिन कोयला मजदूर पंचायत को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि पात्र घोषित ठेका श्रमिकों की स्थिति ही बदल दी गई है।
उनका आरोप है कि प्रबंधन और ठेकेदारों के रिकॉर्ड में न केवल पात्र ठेका श्रमिकों की संख्या कम कर दी गई है, बल्कि उनके कार्य दिवस भी आधे दर्शाए गए हैं। इससे श्रमिकों को मिलने वाली बोनस राशि प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि समझौते की धारा दो के आधार पर अधिकारी केवल माइनिंग एक्टिविटी में कार्यरत ठेका श्रमिकों को बोनस देने की बात कर रहे हैं, जबकि समझौते की धारा एक में सभी ठेका श्रमिकों को भुगतान करने का स्पष्ट प्रावधान है। हायरिंग ऑफ इक्विपमेंट के अंतर्गत कार्यरत जीप चालकों सहित अन्य श्रमिकों को भुगतान से बाहर रखने की कोशिश का भी कोयला मजदूर पंचायत विरोध कर रही है।
नोटिस बोर्ड पर पात्र श्रमिकों की सूची लगाने की मांग
अख्तर जावेद उस्मानी ने प्रबंधन से मांग की है कि प्रत्येक इकाई के नोटिस बोर्ड पर ठेकेदारों के नाम के साथ उनके अधीन कार्यरत ठेका श्रमिकों की सूची सार्वजनिक की जाए। इसमें वित्तीय वर्ष के प्रत्येक माह में किए गए कार्य दिवस और भुगतान की गई राशि का पूरा विवरण भी प्रदर्शित किया जाए, ताकि श्रमिक स्वयं अपने कार्य दिवस और भुगतान का मिलान कर सकें।
उन्होंने इस संबंध में एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक तथा सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधकों को पत्र लिखकर भुगतान से पहले पात्र श्रमिकों की सूची प्रकाशित करने और सही बोनस भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। पत्र की प्रति हिन्द मजदूर सभा के महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू को भी भेजी गई है।

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