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: काफ़ी प्राचीन है माँ चंद्रहासिनी और माँ नाथलदाई मंदिर...

Admin Sun, Oct 6, 2024

जांजगीर जिला मुख्या लय से 120 और रायगढ़ से 30 किमी किमी (अब सक्ति जिला)दूर चित्रोत्पला गंगा,महानदी के तट पर चंद्रपुर पहाड़ी पर विराज मान हैं मां चंद्रहासिनी और नदी के बीच मौजूद हैं मां नाथल दाई।नवरात्रि में दोनों देवियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।चंद्रहासिनी देवी और नाथलदाई का प्राचीन मंदिरहै।महानदी अपने जल से देवियों के पांव पखारती हैं,वहीं मांड नदी,जीवन दायिनी से कम नहीं है चंद्रमा के आकार की विशेष ताओं के कारण चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी मां के नाम से जाना जाता है।किवदंती है कि चंद्रसेनीदेवी ने सरगुजा को छोड़ उदयपुर रायगढ़ होते महानदी के किनारे चंद्रपुर की यात्रा की महानदी की पवित्र शीतलधारा से प्रभावित हो माता विश्राम करने लगीं,इसके बाद उन्हें नींद आ गई। वर्षों व्यतीत हो जाने पर उनकी नींद नहीं खुली, एक बार संबलपुर के राजा की वहाँ से सवारी गुजरी, चंद्रसेनी देवी पर उनके पैर लग जाने से चोट लग गई, फिर एक दिन देवी ने सपने में दर्शन दिये,उन्हें मंदिर बना,मूर्ति भी स्थापित करने को कहा। फिर इस मंदिर का निर्माण हुआ, सिद्धशक्ति पीठ मां चंद्रहासिनी छतीसगढ़ के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक चन्द्रपुर की छोटी पहाड़ी के ऊपर विराजिती है,साथ ही यहां पौराणिक,धार्मिक कथाओं की सुंदर झाँकियां 100 फीट के महादेव पार्वती की मूर्ति, माँ चंद्रहासिनी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं का मनमोह लेती है।चारों ओर की प्राकृतिक मनमोहक सुंदरता से घिरे चंद्रपुर की खूबसूरती भी देखने लायक है। महा नदी- माण्ड नदी के बीच बसे चंद्रपुर में मां दुर्गा के 52 शक्ति पीठों में से एक मां चंद्रहासिनी के रूप में विराजित हैं,पहले यहां बलि प्रथा का प्रचलन था लेकिन समय के साथ इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है मंदिर के प्रांगण में अर्धनारीश्वर, पवनपुत्र, कृष्णलीला चीरहरण, महिषासुर वध,चारधाम,नवग्रह सर्वधर्म सभा,शेषनाग अन्य देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियाँ दिखाई देती है इसके अलावा शीश महल,तारा मण्डल, मंदिर के मैदान पर एक चलती हुई झांकी महाभारत काल को भी जीवंत करती है,महाभारत के पात्रों कथानक के बारे में जानने मिलता है वहीं माता चंद्रहासिनी, चंद्रमा के आकार की मूर्ति के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। नदी के बीच टापू पर विराजी हैं माँ नाथलदाई नाथल दाई मंदिर, महा नदी के बीच में स्थित है।नदी के बीचों-बीच मंदिर होने से भी धार्मिक, पर्यटन स्थल के तौर पर महत्व है। महानदी के बीचों बीच होने के बाद भी यह कभी नहीं डूबती है,बरसात में कई बार बाढ़ की स्थिति भी बनती है,पर नदी का पानी मां के चरणस्पर्श कर नीचे उतर जाता है।नवरात्रि में बड़ी संख्या में अन्य प्रदेशों से भी लोग यहां आते हैं।

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