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: सूर्य उदित होकर गर्भगृह में महादेव का प्रकाशीय अभिषेक करता है..

Admin Sun, Dec 29, 2024

प्राचीन शिव मंदिर नारा यणपुर कसडोल (जिला बलौदा बाजार) सूर्य- आदि त्य पूर्वाभिमुखी मंदिर भग वान शिव को समर्पित है, मंदिर की बाह्यभित्ती अलं करण रहित है,मंदिर पंचरथ शैली में निर्मित है,द्वारपालों की की मूर्तियों से द्वारशाखा ओं को अलंकृत किया गया है, सिरदल के ऊपर सूर्य को स्थानक मुद्रा में उतख़चित किया गया है, मंदिर 9वीं शताब्दी का है।जब प्रातः सूर्य उदित होकर अपने प्रकाश से मंदिर के भीतर गर्भगृह में महादेव का प्रकाशीय अभिषेक करता है, नारायणपुर ग्राम के शिव मंदिर के उत्तर दिशा की जंघा भाग की दीवार में नीचे के देव कोष्ठ में वेशधारी सूर्य की प्रतिमा उत्कीर्ण है।डमरू ग्राम से भी सूर्य की प्रतिमा प्राप्त हुई है।सूर्य की उपा सना भारत के साथ विश्व की अनेक संस्कृतियोँ में नजर आता है। छत्तीसगढ में 1500 वर्ष पूर्व के प्रमाण आज भी मौजूद है। प्राचीन काल से ही सूर्य पूजा की परंपरा रही है।छग में भी प्राचीन सूर्यदेव की प्रतिमा के अनेक प्रमाण उपलब्ध है,अत: छठपूजा को बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा तक ही नही देखना चाहिए बल्कि सभी समाज के लोग सद्भाव से सूर्य उपासना का पर्व मानने लगे तो हमारी भारतीय संस्कृति को और अधिक मजबूती मिलेगी। कसडोल के समीप 8 किमी में प्राचीन शिव मंदिर 9वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था।महानदी के पास स्थित यह ग्राम नारायणपुर प्राचीन शिव मंदिर के होने से क्षेत्र में प्रसिद्ध है, शिव मंदिर में प्राचीन वो सारी कलाकृति है जो प्राचीन समय में बनाई जाती रही जैसे हाथी,घोड़े,मैथुन आदि की मूर्तियाँ ....सिरपुर मार्ग में ग्राम बगार से महज 3 किमी पश्चिम दिशा में स्थित यह अंतिम ग्राम है मंदिर के पीछे महानदी का प्रवाह भी सुंदरता को और बढ़ाता है, कहते है जब प्रातः सूर्य उदित होता है तो गर्भगृह में महादेव का प्रकाशीय अभि षेक करता है....यहाँ जो शिवलिंग है,लगभग वैसा ही सिरपुर, तुरतुरिया, मदकूदीप में भी देखने मिलता है..इस अद्भुत मंदिर में जाते ही अशांत मन शांत हो जाता है...यह मंदिर संरक्षित धरोधर है इसलिए यहां प्रतिदिन यहां के चौकी दार द्वारा ही पूजन आदि किया जाता है लेकिन सावन मास, महाशिवरात्रि को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है,कहा जाता है कि इस मंदिर से भी भाई- बहन की कहानी प्रचलित है... मंदिर के निर्माण शिल्पकार भाई- बहन ही थे,जिन्होंने मेहनत कर शिव को यह स्थान समर्पित किया था। यहां पुरातात्विक विभाग द्वारा खुदाई में प्राप्त कुछ प्राचीन मूर्तिया प्राप्त हुई है जिसमे रतनपुर में भैरवजी के मूर्ति के समान कद-काठी की जीर्णशीर्ण अवस्था में मूर्ति भी प्राप्त हुई है.... मंदिर के चारोँ ओर महावीर,नरसिंह, विष्णु, इंद्र,परी,गरुड़ आदि की मूर्ति भी है।मंदिर देखने से महसूस होता है कि यह धस रहा है जबकि यह हजारों वर्षों से ऐसे ही खड़ा है।वर्तमान में यह मंदिर पुरातात्विक विभाग के आधीन है। छत्तीसगढ़ सरकार ने कसडोल से सिरपुर के मार्ग को रामवन गमन मार्ग के तहत चिन्हां कित किया है, जिसमें नारायणपुर, तुरतुरिया, सिरपुर शामिल हैँ ।

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