Advertisment

16th August 2026

BREAKING NEWS

जय स्तंभ सेवा समिति के तत्वावधान में हुआ ध्वजारोहण कार्यक्रम, वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र अरोड़ा ने फहराया तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगा विद्यालय

स्वतंत्रता दिवस समारोह अत्यंत गरिमामय, उत्साहपूर्ण एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में मनाया गया

18.75 करोड़ की लागत से बनेगा एमसीबी का नया एकीकृत जिला कार्यालय भवन, 22 माह में होगा निर्माण

शान से लहराया तिरंगा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ली परेड की सलामी

: विश्व की एकमात्र अद्भुत रूद्र शिव प्रतिमा, जिसे 12 राशियों और 9 ग्रहों से भी जोड़ा जाता है..

Admin Wed, Aug 28, 2024

छत्तीसगढ के ताला गांव में रुद्र शिव की अद्भुत प्रतिमा भारत नहीं विश्व में कौतुहल का विषय बनी हुई है।गांव बिलासपुर से 30 किमी दूर है,टीलों के उत्खनन से 5वीं शताब्दी के 2मंदिर मिले हैं देवरानी और जेठानी।देव रानी मंदिर के उत्खनन में 87-88 में शिव की विशाल प्रतिमा मिली जिसे रुद्र शिव नाम दिया गया है,प्रतिमा 9 फीट लम्बी,4 फीट चौडी है शिलाखंड पर बनी है।वजन 5-6 टन के बीच है।इसका अलंकरण 12 राशियों और 9 ग्रहों के साथ हुआ है।प्रतिमा में 11अंग विभिन्न जलचर -थलचर प्राणियों के हैं।ताला में महत्वपूर्ण मूर्ति कला लाल बलुआ पत्थर से बनी दो मीटर से ज़्यादा ऊँची आकृति है। जिसे रुद्र शिव कहा जाता है।मूर्ति कला का एक अनूठा नमूना है जो पुरातत्व इतिहास में कहीं और नहीं पाया जाता है।रुद्रशिव की अनूठी कला कृति है।इसे शिव के रूप मेंअनुमानित करने का एक और संभावित कारण यह है कि शिव को पशुपति नाथ, जानवरों के भगवान के रूप में भी जाना जाता है। यह आकृति इस छवि के शरीर के अंगों के रूप में गढ़ी गई विभिन्न जानवरों की आकृ तियों के माध्यम से उनके उस पहलू को दर्शाती है। लाल बलुआ पत्थर से बनी शिव की इस अनोखी मूर्ति को समझना जानवरों और इंसानों के चेहरे से बनेशरीर के अंग अनोखी आकृतिको बनाते हैं।सिर का वस्त्र साँप की कुंडलियों से बना है, नाक एक गिरगिट है जिस का अंत वृश्चिक जैसा है, मेंढक से बनी भौहें,अंडे के रूप में नेत्र गोलक,मोर जैसे कान,ठोड़ी के साथ केकड़ा – मछली से बनी मूंछें,कंधे मगरमच्छ का मुंह हैं,हाथी की सूंड भुजाएँ,साँप के मुँह जैसी उंगलियाँ…(कुछ लोग पंचमुखी नाग या पाँच मुँह वाला साँप कहते हैं)स्तनों पर मानव आकृतियाँ,पेट के रूप में एक गोल घड़े जैसी मानव आकृति,कुंभ को दर्शा सकती है,जांघों पर विद्याधर की आकृतियाँ – मत्स्य कन्या या जलपरियाँ हो सकती हैं,तराजू या तुला के समान हैं,जांघों के किना रों पर गंधर्व की आकृतियाँ, संभवतःमत्स्य कन्या भी, सिंह घुटनों के बल बैठा है, सिंह -हाथी जैसे पैर,दोनों कंधों पर रक्षक के रूप में दो सांप,एक और सांप पैरों के निचले हिस्से के पास पीछे से लिपटा हुआ था।पशु एवं ज्योतिषीय संकेत। जैसा कि देख सकते हैं कि इनमें कुछ जानवर विभिन्न ज्योतिषीय संकेतों से जुड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि ह छवि के कुछ हिस्से टूटे हुए हैं, फिर भी इसकी पूजा की जाती है। एएस आई ने इसे एक छोटे से बाड़े में रखा है जिसे बंद रखा जाता है, लोग धातु के दरवाजे के माध्यम से भी इसकी पूजा करते हैं।देव रानी-जेठानी मंदिर परि सर,जहाँ यह मूर्ति वर्तमान में रखी गई है, गुप्तकाल के दौरान रखी गई थी,लेकिन इस विशेष मूर्ति की तिथि के बारे में कोई सुराग नहीं है। इसकी शैली भी इतनी अनूठी है कि इसे किसी निश्चित अवधि से जोड़ना मुश्किल है। विशालता को देखते यह प्राचीन काल से संबंधित हो सकती हैया यह बाद की लोककला हो सकती है…!

विज्ञापन

जरूरी खबरें