वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडे की कलम से..*(कॉलम 21 सालों से लगातार) : जिनको सूरज मेरी चौखट से मिला करता था.... अब वो खैरात में देते हैं उजाले मुझको....
Praveen Nishee Fri, Nov 6, 2026
आदिवासी अंचल बस्तर, को प्रकृति ने ही दिल खोलकर सजाया,संवारा है।वहाँ खनिज, जंगल,जल,वायु मेहनती इंसानों के चलते कभी हैदराबाद स्टेट, बैलाडिला के पहाड़ खरीदना चाहते थे, कभी ओड़िशा में भी मिलाना चाहते थे.....! प्रयत्न तो बहुत हुए पर बस्तर,छग का ही अभिन्न अंग बना रहा।भारत को आजाद करने से पहले अंग्रेज, बैलाडीला पहाड़, हैदराबाद के निजाम को बेचना चाहते थे, बस्तर की रानी प्रफुल्ल कुमारी देवी ने विरोध किया था।इससे नाराज अंग्रेजों ने उनके पति प्रफुल्लचंद्र भंजदेव को बस्तर छोड़ कोलकाता रहने मजबूर कर दिया। महारानी को एपेंडी साईटिस पीड़ित बताकर लंदन में साजिश केतहत मरवा दिया था? (ऐसी चर्चा थी) रानी की अंग्रेज विरोधी नीतियों के कारण ही 35 किमी लंबा बैलाडीला पहाड़ आज बस्तर, छग का हिस्सा है,पहाड़ से प्राप्त लौह अयस्क, पहाड़ के नीचे बसे गांव से टीन अयस्क की खुदाई कर केंद्र-राज्य सरकार को अरबों ₹ राजस्व प्राप्त हो रहा है, बैलाडीला का पहाड़ निजामों के हाथों चला जाता तो छग में एनएमडीसी के सीएसआर मद के तहत सैकड़ों विकास कार्य ही नहीं हो पाते।कांग्रेस ने बस्तर की फूलोदेवी नेताम को राज्य सभा सदस्य भी बनाया आदिवासी नेता झुमुक लाल भेडिय़ा भी कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।वैसे बस्तर के लेखक,वक्ता, राजनीतिज्ञ होम्योपेथी डॉ. अभिमन्यु रथ को ओडि़सा कोटे से राज्य सभा सदस्य चुना गया था,3 अप्रैल 56 से 2 अप्रैल 62 तक वे रास सदस्य चुने गये थे।सन 1952-56 तक बस्तर को ओडि़सा में मिलाने का एक असफल आंदोलन चलाया था।वे सफलतो नहीं हो सके पर तब ओडि़सा सरकार ने पुरस्कार स्व रूप राज्यसभा सदस्य बनाया था।52 केचुनाव में ओडि़सा (तब उड़ीसा) ऐसा राज्य था जहां कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला था।उसे गणतंत्र परिषद (राजाओं,जमींदारों की पार्टी) के साथ मिल सरकार बनाना पड़ा था। सरकार के सीएम बने थे, डॉ. हरेकृष्ण मेहताब। उत्कल संस्कृति से प्रभावित हो आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों सहित बस्तर को भी उड़ीसा में मिला कर सर्वांगीण विकास के पक्षधर थे। वे चाहते थे, बस्तर के भीतर से ही उड़ीसा में शामिल होने की आवाज उठे ताकि राज्य पुनर्गठनआयोग के समक्ष दम दार मामला पहुँचाया जा सके। इसके लिए जगदलपुर के अभिमन्यु रथ को चुना।बस्तर के पूर्वी अंचल के भतरा आदिवासियों से रथ ने संपर्क किया, उनकी भाषा-संस्कृति, उड़ीसावालों से मेल खाती थी, उन्होंने हजारों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन पुनर्गठन आयोग अध्यक्ष सैय्यद फजल अली को सौंपा था,खबर सीपी एण्ड बरार के सीएम पं.रवि शंकर शुक्ल को मिली तो अपने मित्र सुंदर लाल त्रिपाठी को इस मुहिम के खिलाफ खड़ा किया। बस्तर को उड़ीसा में शामिल करने रैली का भी विरोध भीहुआ। उपन्यासकार शानी, अपनी पुस्तक 'कस्तूरी' में लिखा था,हम बस्तर में है तो सरकार हमे कौन लड्डू खिला रही है...?उड़ीसा में रहेंगे तो कौन कड़ाही में तले जाएंगे..? बाद में मामला पीऍम पं.नेहरू तक पहुंचा, उनके प्रयास से बस्तर, उड़ीसा में जाने बाल-बाल बच गया...।बाद में अभिमन्यु रथ के प्रयास के मद्देनजर उड़ीसा कोटे से राज्य सभा का सदस्य बनाया गया। वे नगर पालिका पार्षद भी बने, कुछ वर्षों पूर्व उनका रायपुर रेलवे स्टेशन में हृदयघात से निधन हो गया।उनके परिजन अभी भी जग दलपुर में रहते हैं।
स्वामी विवेकानंद का रायपुर में रहवास.....
स्वामी विवेकानंद ने बालक नरेन्द्र के रूप में 1877 में कुछ माह रायपुर में गुजारा था,पिता माता,अपने परिजनों के साथ ने घर पर अध्ययन किया था,स्व.आत्मानंद के लेख के मुताबिक जब जबलपुर से बैलागाड़ी से बालक नरेन्द्र रायपुर आ रहे थे, करीब 15 दिन लगा था। रास्ते में दोनों किनारों परपत्तों और फूलों से लदे हरे वनवृक्ष, उन्नत शिखर विंध्याचल में दोनों ओर की पहाड़ी चोटियां आकाश को चूमती खड़ी थी, फल- फूल से लगी वृक्षों की लताएं पर्वत को अपूर्व शोभा प्रदान कर रही थी,मधुर कलरव करते रंग- बिरंगे पक्षी घूम रहे थे। कभी आहारकी खोज में धरती पर उतर रहे थे।कुछ ऐसे दृश्य नरेंद्र के पटल में अंकित हो गया,पहली भावानुभूति थी।अभी भी बूढ़ापारा बिजली आफिस के पास मेघमार्केट के करीब वह भवन सुरक्षित है जहां वे परिवार के साथ कुछ समय रहे थे,कमरा अभी भी बंद है।भवन को स्मारक बनाने योजना भी बनी है। वैसे 2027 में विवेकानंद के रायपुर आगमन के 150 साल पूरे हो जाएंगे, विवेकानंद एयरपोर्ट,बूढ़ा तालाब में उनकी मूर्ति स्थापना कर छग से संबंध दर्शाने, प्रयास तो हुआ ही है।
आँखों के इलाज से
समाज की आँख खोलने तक ....
राजधानी रायपुर के नयापारा में डॉ दिनेश मिश्र लोगों की आँखों का इलाज सस्ते में तो करते ही हैं, अब तो बेटा डॉ प्रांजल भी आँखों का इलाज कर रहा है।कई पुरस्कार प्राप्त डॉ दिनेश, अंधश्रद्धा निर्मूलन के क्षेत्र में चर्चा में रहते हैं। हाल ही में यूनाइटेड नेशन्स जिनेवा मेँ व्याख्यान दे कर लौटे हैँ। जिनेवा में कहा - संसार के अनेक देशों से अंध विश्वास के ही कारण महिलाओँ के साथ प्रताड़ना की घटनाएं घटती है,उनके मानवाधिकार हनन के मामले सामने आते है , जो चिंतनीय है।अविकसित-विकासशील देशों से ऐसी घटनाएं अधिक हैं। डॉ. मिश्र ने डायन प्रताड़ना, मानवाधिकार पर व्याख्यान में कहा महिला प्रताड़ना, मान वाधिकार हनन के प्रमुख कारण अंधविश्वास डायन के संदेह में प्रताड़ना है।नेपाल,श्रीलंका पाकिस्तान,बंग्लादेश,अफ्रीका के अनेक देशों में जारी है एशिया सहित दक्षिणअफ्रीका, तंजानिया,यूगांडा आदिअनेक देशों मेंघटनाओं के आंकड़े हैँ।महिलाओं के अधिकारों को लेकर दावों, वास्तविकता स्थिति के संबंध भिन्नता बताती है,महिला प्रताड़ना के मामलों में तो मानव या इंसान ही नही समझा जाता तो मानवाधिकार देने के दावे झूठे साबित हो जाते हैँ।अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, वैज्ञानिक,जागरूकता की कमी,गैरजरूरी परंपराओं को आंख मूंद पालन करने की आदत से न ही अंधविश्वास खत्म हो पाते हैं,न ही पीड़ितों को राहत मिल पाती हैअफ्रीका में कालाजादू, मुस्लिम देशों में जिन्न,प्रेत,एशिया के कुछ देशों में डायन, चुड़ैल, जैसे अंधविश्वास आज भी व्याप्त है, इसी कारण महिलाओँ,बच्चों को शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है।इसके निर्मूलन में तो सामाजिक-जागरुकता,अभियान,स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, सक्षम कानून बनाकर, महिलाओँ, प्रताडितों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।यूनाइटेड नेशन्स को डायन के संदेह में प्रताड़ित महिला अधिकारों, उनके जीवन की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की आवश्यकता है ताकि प्रताडितों को राहत न्याय मिल सके।डॉ.दिनेश 20 17 जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कार्य शाला में शामिल हुए थे। कार्य शाला में डायन शक में महिला की प्रताड़ना, मानवाधिकारों के मुद्दे पर व्याख्यान दिया था। 2014 में बेल्जियम में भी व्याख्यान दिया था,डॉ. दिनेश करीब 30 साल सेअंधविश्वास-कुरीतियों के खिलाफ काम कर रहे हैं।जादू -टोने, टोनही के शक में महिला प्रताड़ना के खिलाफ लोगों को जागरूक भी करते रहे हैं। 3 हजार से ज्यादा सभाएं की हैं। स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संगठनों के साथ कार्य शालाएं करके 2 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को जागरूक किया है।छत्तीसगढ़ के अलावा मप्र,असम, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा,राजस्थान, बिहार,उत्तर प्रदेश,कर्नाटक में जागरूकता अभियान चलाया है।
और अब बस...
0सौरभ चंद्राकर के भारत लौटने के बाद महादेव सट्टा ऐप घोटाले के बड़े राज खुल सकते हैं। महादेव सट्टा ऐप के 508 करोड़ ₹ की प्रोटेक्शन मनी को लेकर छ्ग में जमकर सियासत हुई थी।
0 छग कांग्रेस राज में सरकार के करीबी रहे 5 आईपीएस फिर सीबीआई की रडार पर हैं।एक बीजेपी नेता की शिकायत पर सीबीआई अलग -अलग मामलों में भूमिका को संज्ञान में लेना शुरू कर दिया है।
(7नवम्बर 2026)
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*{शंकर पांडे (वरिष्ठ पत्रकार) ऍमए, बीएस. सी,एलएल.बी, बीजे (पत्रकारिता) हैं।अविभाजित मप्र से छत्तीसगढ़ में 46 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैँ, पत्रकारिता के साथ ही अपने "छत्तीसगढ़" पर 6 पुस्तकें भी लिख चुके हैं, प्रिंट सहित इलेक्ट्रानिक मिडिया में कार्य किया है। रूचि राजनीति, इति हास,क्राइम,संस्कृति लेखन है।
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*{आइना-ए- छत्तीसगढ़ कॉलम 21 सालों से लगातार }
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