वक्त बदला, राहें बदलीं, मगर नहीं बदली दोस्तों की दोस्ती : चार दशक पुरानी दोस्ती का फिर हुआ मिलन, 1984 बैच के मित्रों ने सजाई यादों की महफिल
Praveen Nishee Mon, Aug 24, 2026
मनेन्द्रगढ़। एमसीबी। वक्त भले ही लोगों को अलग-अलग राहों पर ले जाए, लेकिन सच्ची दोस्ती समय और दूरी की सीमाओं से परे होती है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए वर्ष 1984 बैच के मित्रों का आठवां मिलन समारोह रायपुर के मुहूर्त रिसॉर्ट में 21 एवं 22 अगस्त को हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ संपन्न हुआ। वर्षों बाद एक-दूसरे से मिलकर मित्रों ने पुरानी यादों को ताजा किया और दोस्ती के रिश्ते को फिर मजबूत किया।
यह मिलन समारोह वर्ष 2007 से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। अब तक शिवतराई, अमृतधारा, बांधवगढ़, कान्हा-किसली, ईब वैली, अचानकमार, सिरपुर और बिरौली सहित विभिन्न दर्शनीय स्थलों पर मित्रों का मिलन हो चुका है। इस वर्ष आठवें आयोजन के लिए राजधानी रायपुर के मुहूर्त रिसॉर्ट का चयन किया गया।
ढोल-नगाड़ों की धुन और चंदन तिलक के साथ मित्रों का आत्मीय स्वागत कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पहले दिन परिचय सत्र में सभी ने अपने जीवन के अनुभव और पुरानी स्मृतियां साझा कीं। दूसरे दिन गीत-संगीत, नृत्य, मनोरंजक खेलों और विभिन्न प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह और उमंग भर दी। उम्र के इस पड़ाव पर भी मित्रों ने बचपन और युवावस्था की तरह पूरे उत्साह से कार्यक्रमों में सहभागिता की।
सेवानिवृत्त होने वाले मित्रों का सम्मान
समारोह में 31 अगस्त 2026 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले मित्र सी.के. लखेरा और इम्तियाज बक्स का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। दोनों ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे एक दायित्व से जरूर मुक्त हो रहे हैं, लेकिन कभी रिटायर नहीं होंगे, क्योंकि दोस्तों का प्यार, स्नेह और अपनापन हमेशा उनके साथ रहेगा।
समारोह में दिल्ली से मनोज दुबे, दुर्ग से आलोक शिवहरे, कोलकाता से स्वजन सेन, भिलाई से विकास पात्रों, अंबिकापुर से ज्ञानेश श्रीवास्तव, बिलासपुर से अनिल अरोरा एवं दविंदर कालरा, कोरबा से शशांक चक्रवर्ती, चिरमिरी से सी.के. लखेरा, झगराखाण्ड से भानू घोष तथा मनेन्द्रगढ़ से सुशील ताम्रकार, गुरजीत सिंह खानूजा, काके, मुकेश अग्रवाल, प्रवीण निशि, इम्तियाज बक्स और श्याम सुंदर पोद्दार सहित अन्य मित्र शामिल हुए।
कार्यक्रम का संयोजन आलोक शिवहरे, अनिल अरोरा और मनोज दुबे ने किया।
आलोक शिवहरे ने कहा कि बचपन और युवावस्था की दोस्ती जीवन की खूबसूरत यादों में शामिल होती है। दोस्तों के साथ बिताए पल जीवनभर याद रहते हैं और ऐसे मिलन समारोह उन यादों को फिर जीवंत कर देते हैं।
अनिल अरोरा ने कहा कि कुछ दोस्त पुराने होकर भी बेहद खास होते हैं और दिल के सबसे करीब रहते हैं। वर्षों बाद जब सभी यार एक साथ मिलते हैं तो पुराने पल और उनसे जुड़ा अपनापन फिर लौट आता है।
मनोज दुबे ने कहा कि पुराने दोस्तों के साथ थोड़ी सी मुलाकात भी जिंदगी जीने का नया जज्बा पैदा करती है। मित्र एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं और यही दोस्ती की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने भविष्य में भी नियमित रूप से मिलते रहने का संकल्प व्यक्त किया।
दोस्ती और स्मृतियों की अमूल्य निधि बना समारोह
समारोह में शामिल सभी मित्रों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्याम सुंदर पोद्दार ने कहा कि वक्त की धूल में कुछ रिश्ते भले ही दूर हो जाएं, लेकिन सच्चे दोस्त दिल में हमेशा बसे रहते हैं। वर्षों बाद सभी मित्रों का एक साथ मिलना बेहद सुखद अनुभव रहा। यह आयोजन केवल मित्रों का संगम नहीं, बल्कि अनुभवों, स्मृतियों और स्नेह की ऐसी अमूल्य निधि है, जो सभी के हृदय में हमेशा अंकित रहेगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में अगला मिलन समारोह बिलासपुर-अमरकंटक के बीच सोनभद्र रिसॉर्ट में आयोजित किया जाएगा।
आठवें मिलन समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समय बदल सकता है, परिस्थितियां बदल सकती हैं और जीवन की राहें अलग हो सकती हैं, लेकिन सच्ची दोस्ती की आत्मीयता कभी कम नहीं होती।

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