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26th October 2026

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78 वर्षों से श्रीराम मंदिर प्रांगण में हो रही मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का दिया संदेश

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बंग समाज का विजया मिलन उत्सव संपन्न, बंगाली संस्कृति की दिखी अनूठी झलक : 78 वर्षों से श्रीराम मंदिर प्रांगण में हो रही मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का दिया संदेश

Praveen Nishee Mon, Oct 26, 2026

मनेंद्रगढ़। एमसीबी। श्रीराम मंदिर प्रांगण में बंग समाज का विजया मिलन उत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बंगाली संस्कृति, धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और नारी शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। उत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विभिन्न प्रतियोगिताओं और वरिष्ठजनों के सम्मान के माध्यम से समाज की समृद्ध परंपराओं को जीवंत किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डिप्टी कलेक्टर श्रीमती इंदिरा मिश्रा तथा विशिष्ट अतिथि कैट के जिलाध्यक्ष रघुनाथ पोद्दार उपस्थित रहे। पत्रकार गोपाल गुप्ता ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। पुरुष बंग समाज के अध्यक्ष शिबू सरकार एवं सचिव अरुण मित्रा की उपस्थिति में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अतिथियों और समाज के वरिष्ठजनों को हरे-भरे पौधे भेंट किए गए।

1948 से चली आ रही है मां दुर्गा की पूजा की परंपरा

बंग महिला समाज की अध्यक्ष ज्योति मजूमदार ने बताया कि मनेंद्रगढ़ के श्रीराम मंदिर प्रांगण में वर्ष 1948 से मां दुर्गा की स्थापना कर बंगाली रीति-रिवाजों और विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की जा रही है। लगभग 78 वर्षों से निरंतर चली आ रही यह परंपरा समाज की अटूट आस्था, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1948 में स्वर्गीय डॉ. सरकार के प्रयासों और सामाजिक सदस्यों के सहयोग से हुई थी।

उन्होंने बताया कि दुर्गोत्सव के पांच दिनों के दौरान पुरुषों, बच्चों और महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक और ज्ञानवर्धक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिनमें समाज के सभी वर्ग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

गीत-संगीत और प्रतियोगिताओं ने बांधा समां

दुर्गोत्सव के दौरान बंगाली गीतों और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। बच्चों के बौद्धिक विकास और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से भी कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें क्ले से भगवान की मूर्ति बनाना, शंख बजाना, उलू ध्वनि, अल्पना बनाना, धुनुची नृत्य, बंगला गान और बंगला नृत्य जैसी प्रतियोगिताएं प्रमुख रहीं।

पांच दिनों तक चली इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को विजयादशमी के दिन पुरस्कृत किया गया। वहीं, समाज के वरिष्ठजनों का श्रीफल और पौधे भेंट कर सम्मान किया गया। पूरे आयोजन में बंगाली संस्कृति की पारंपरिक छटा और सामाजिक सौहार्द की भावना देखने को मिली।

महिला समाज की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में बंग महिला समाज की सचिव अनिमा घोषाल, कोषाध्यक्ष सुषमा दत्ता, अप्पू राहा, प्रीति मित्रा, अरुण मजूमदार, राजेंद्र केशवानी, शिव गुप्ता, अजित सरकार, मौसमी दत्ता, पूजा घोषाल, लीना मजूमदार, सुनैना, रीना चौधरी, अनिला रॉय, रोहिणी शर्मा सहित बंग समाज के अनेक महिला एवं पुरुष सदस्य उपस्थित रहे।

विजया मिलन उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंगाली संस्कृति के संरक्षण, नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने, नारी शक्ति को प्रोत्साहित करने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया।

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